40-verse Awadhi hymn by Tulsidas. Recited on Tuesdays and Saturdays. Removes fear, grants strength.
दोहा:
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मन मुकुरु सुधारि।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥
चौपाई:
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥
राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥
महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥
Tulsidas's 8-verse hymn naming the troubles Hanuman has resolved. Recited weekly on Tuesdays.
बाल समय रवि भक्षि लियो तब, तीनहुँ लोक भयो अँधियारो।
ताहि सों त्रास भयो जग को, यह सङ्कट काहु सों जात न टारो॥
देवन आनि करी विनती तब, छाँडि दियो रवि कष्ट निवारो।
को नहिं जानत है जग में कपि, सङ्कटमोचन नाम तिहारो॥
The most universally recited Hanuman prayer in India. Composed by Goswami Tulsidas (1532-1623) in Awadhi during his imprisonment by Mughal emperor Akbar. Forty chaupai verses preceded by two dohas and followed by a closing doha. Recited daily by hundreds of millions; one rendition typically takes 8-10 minutes. Eleven recitations (gyarah path) on Tuesdays and Saturdays is the most popular Hanuman vrata.
दोहा
श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि ।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥
बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार ।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार ॥
चौपाई
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर । जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥ १ ॥
राम दूत अतुलित बल धामा । अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा ॥ २ ॥
महाबीर बिक्रम बजरंगी । कुमति निवार सुमति के संगी ॥ ३ ॥
कंचन बरन बिराज सुबेसा । कानन कुंडल कुंचित केसा ॥ ४ ॥
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै । काँधे मूँज जनेऊ साजै ॥ ५ ॥
शंकर सुवन केसरीनंदन । तेज प्रताप महा जग बंदन ॥ ६ ॥
बिद्यावान गुनी अति चातुर । राम काज करिबे को आतुर ॥ ७ ॥
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया । राम लखन …
Sankat Mochan Hanuman Ashtakam (full — all 8 verses)
सङ्कट मोचन हनुमानाष्टक (पूर्ण)
Form: Hanuman
The "remover-of-distress" eight-verse hymn by Goswami Tulsidas. Tradition holds that reciting all eight verses with faith destroys any sankat (crisis) — illness, debt, fear, court case, exam, accident. Each verse recalls one episode from Hanuman's life where he removed a great distress.
बाल समय रवि भक्षि लियो तब तीनहुँ लोक भयो अँधियारो ।
ताहि सों त्रास भयो जग को यह सङ्कट काहु सों जात न टारो ॥
देवन आनि करी बिनती तब छाँड़ि दियो रवि कष्ट निवारो ।
को नहिं जानत है जग में कपि सङ्कटमोचन नाम तिहारो ॥ १ ॥
बालि की त्रास कपीस बसै गिरि जात महाप्रभु पन्थ निहारो ।
चौकि महामुनि शाप दियो तब चाहिय कौन बिचार बिचारो ॥
कै द्विज रूप लिवाय महाप्रभु सो तुम दास के सोक निवारो ।
को नहिं जानत है जग में कपि सङ्कटमोचन नाम तिहारो ॥ २ ॥
अङ्गद के सङ्ग लेन गये सिय खोज कपीस यह बैन उचारो ।
जीवित ना बचिहौं हम सो जु बिना सुधि लाए इहाँ पगु धारो ॥
हेरि थके तट सिन्धु सबै तब लाय सिया-सुधि प्राण उबारो ।
को नहिं जान…
The "thunderbolt-arrow" stotra by Goswami Tulsidas — considered the most fierce Hanuman invocation. Recited when great evil must be repelled: black magic, ghosts, pretas, court cases, severe illness, sworn enemies. Each verse commands Hanuman to act — "shatru sanharo" (destroy enemies), "raksha karo" (protect). Recited 7 or 11 times consecutively in the most extreme situations. Composed in the Awadhi-Hindi dialect of Tulsidas (1532-1623).
दोहा
निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करै सनमान ।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करै हनुमान ॥
चौपाई
जय हनुमंत सन्त हितकारी । सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी ॥ १ ॥
जन के काज विलम्ब न कीजै । आतुर दौरि महा सुख दीजै ॥ २ ॥
जैसे कूदि सिंधु महिपारा । सुरसा बदन पैठि बिस्तारा ॥ ३ ॥
आगे जाई लंकिनी रोका । मारेहु लात गई सुर लोका ॥ ४ ॥
जाय बिभीषन को सुख दीन्हा । सीता निरखि परम पद लीन्हा ॥ ५ ॥
बाग उजारि सिन्धु महँ बोरा । अति आतुर जमकातर तोरा ॥ ६ ॥
अक्षय कुमार मारि संहारा । लूम लपेटि लंक को जारा ॥ ७ ॥
लाह समान लंक जरि गई । जय जय धुनि सुरपुर नभ भई ॥ ८ ॥
अब बिलंब केहि कारन स्वामी । कृपा करहु उर अन्तरयामी ॥ ९ ॥
जय जय लखन …
Eight verses by Tulsidas for relief from all afflictions. Recited at Sankat Mochan Temple, Varanasi and wherever Hanuman is worshipped.
बालसमय रवि भक्षि लियो तब तीनहुँ लोक भयो अन्धियारो।
ताहि सों त्रास भयो जग को यह संकट काहु सों जात न टारो॥
देवन आनि करी बिनती तब छाँड़ि दियो रवि कष्ट निवारो।
को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥
Goswami Tulsidas composed this in Awadhi when his arm was paralysed and no medicine could cure it. He prayed and Hanuman healed him. Recited daily for bodily ailments, especially of arm and shoulder. Stays in the Awadhi form Tulsidas wrote.
सिन्धुतरण, सिय-शोक-निवारण, रबि-बाल-बल बिडम्बन-दिवाकर।
कपि-केसरि-केसरी-नन्दन, बल-दीप, अरि-कुलारिमत-लोचन॥1॥
सुख-संदोह, मोह-तम-तरणी, बन्दौ बल-बुधि-निधान सूर।
जन-मन-शरण-वरण, हरि-दूत, चरण-चलित-त्रिजगत्-त्रासन-धूल॥
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥
राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥
महाबीर बिक्रम बजरङ्गी। कुमति निवार सुमति के सङ्गी॥
कञ्चन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुण्डल कुञ्चित केसा॥
(तुलसीदास द्वारा रचित बाहुक के समस्त बयालीस पद्य पूर्ण रूप से उपलब्ध; यहाँ आरम्भिक पाँच पंक्तियाँ + चालीसा के दो प्रसिद्ध दोहे।)
Adi Shankaracharya's five "jewel-verses" on Hanuman — each closing with the powerful refrain "vibhāvaye vānara-vamśa-ketum" ("I meditate on the banner of the monkey clan"). Recited daily on Tuesdays + during the 11-day Hanuman Jayanti vrata.